सत्य, अहिंसा और लोकतंत्र की आत्मा को नमनv
महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर हरीश रावत का संदेश और उसका गहरा अर्थ
संपूर्ण विश्व को सत्य, अहिंसा और स्वच्छता का मार्ग दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। इस अवसर पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा दिया गया संदेश आज के भारत के लिए विशेष महत्व रखता है।
हरीश रावत ने गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “उनके विचार आज भी भारत की आत्मा और लोकतांत्रिक चेतना का आधार हैं।” यह कथन केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में एक गहरी चेतावनी और दिशा-निर्देश भी है।
महात्मा गांधी का जीवन संघर्ष, सेवा और सत्य का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को केवल सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं बनाया, बल्कि नैतिकता और मानवीय मूल्यों से जोड़ा।
अहिंसा उनके लिए कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा साहस थी। सत्य उनके लिए केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन की कसौटी था।
गांधी जी का स्वच्छता अभियान, ग्राम स्वराज की कल्पना और अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने का विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में था।
हरीश रावत की राजनीति में गांधीवादी मूल्यों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है—चाहे वह जनकल्याणकारी योजनाएँ हों, गरीब और वंचित वर्ग के लिए आवाज़ उठाना हो या लोकतांत्रिक मर्यादाओं की बात।
गांधी जी की पुण्यतिथि पर उनका संदेश यह याद दिलाता है कि सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि सेवा करना होना चाहिए।
हरीश रावत का यह कहना कि गांधी जी का जीवन “सत्य, सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है” आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो जाता है, जब समाज में विभाजन और असहिष्णुता बढ़ती दिख रही है।
महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना तभी सार्थक होगा, जब हम उनके विचारों को अपने आचरण में उतारें। हरीश रावत का यह संदेश केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आज के भारत के लिए एक वैचारिक आह्वान है—सत्य के साथ खड़े होने, अहिंसा को अपनाने और लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखने का।
गांधी अमर हैं—अपने विचारों में, अपने संघर्ष में और हर उस आवाज़ में जो सत्य और न्याय की बात करती है।
