हरीश रावत के नेतृत्व में उत्तराखण्ड पर्यटन का स्वर्णिम दौर
उत्तराखण्ड… देवभूमि, जहाँ आस्था है, साहस है, प्रकृति है — और अपार संभावनाएँ हैं। लेकिन इन संभावनाओं को पहचान कर उन्हें वैश्विक पहचान में बदलना आसान नहीं था। यह एक दूरदर्शी सोच, मजबूत नीति और ज़मीनी क्रियान्वयन की माँग करता था। और इसी दिशा में हरीश रावत जी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने पर्यटन विकास का एक नया अध्याय लिखा।
बारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत सुनियोजित और समेकित विकास की स्पष्ट नीति बनाई गई — अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार, निजी क्षेत्र की सहभागिता, पर्यटन संसाधनों का विकास, और प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से उत्तराखण्ड को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने के लिए “ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना” प्रारम्भ की गई, जिससे टिहरी और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों के गाँव विकास की मुख्यधारा से जुड़े। “वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना” के माध्यम से 1384 से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिला, और अनुदान राशि बढ़ाकर पर्वतीय युवाओं को बड़े अवसर प्रदान किए गए।
चारधाम यात्रा को वर्ष पर्यन्त संचालित करने की दिशा में शीतकालीन चारधाम यात्रा का शुभारम्भ किया गया, ताकि पर्यटन बारहों महीने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करे। “मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ” योजना के माध्यम से 13 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क तीर्थ यात्रा कराई गई — यह पर्यटन को संवेदना से जोड़ने का उदाहरण था।
टिहरी झील को राष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने का मास्टर प्लान तैयार हुआ, साहसिक पर्यटन महोत्सव आयोजित हुए, और राजीव गांधी एडवेंचर अकादमी की नींव रखी गई। पिथौरागढ़ में अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग इवेंट, आठ जिलों में माउंटेन बाइंकिंग आयोजन, ऋषिकेश और जागेश्वर में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव — उत्तराखण्ड को वैश्विक पर्यटन मंच पर स्थापित करने की मजबूत पहल थी।
हिमालय दर्शन योजना, झील दर्शन योजना और हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत से दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच आसान हुई। जानकीचट्टी-यमुनोत्री, पूर्णागिरी और सुरकंडा देवी जैसे रोपवे प्रोजेक्ट्स पीपीपी मोड पर आगे बढ़े — जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा और राज्य को स्थायी आय दोनों सुनिश्चित हुए।
पर्यटन स्थलों पर पार्किंग, प्रसाधन, बायोडायजेस्टर शौचालय जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास किया गया। एशियन डेवलपमेंट बैंक से 350 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक सहमति लेकर पर्यटन ढांचे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। पर्यटन विकी वेबसाइट की लॉन्चिंग ने डिजिटल युग में उत्तराखण्ड पर्यटन को नई पहचान दी।
श्री नंदा देवी राजजात जैसे विश्वप्रसिद्ध आयोजन का सफल संचालन हो या हुनर रोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण — यह स्पष्ट था कि पर्यटन को सिर्फ दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे रोजगार, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया।
हरीश रावत जी की सोच स्पष्ट थी — उत्तराखण्ड का विकास उसकी प्रकृति, संस्कृति और आस्था को संरक्षित रखते हुए किया जाए। पर्यटन को सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि समग्र प्रगति का माध्यम बनाया जाए।
और यही दृष्टि उत्तराखण्ड को केवल देवभूमि नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुई।
