दिल्ली हादसे पर हरीश रावत का कड़ा सवाल: “खुला गड्ढा नहीं, यह प्रशासनिक लापरवाही है”
जनपद पौड़ी के श्री कमल ध्यानी की मौत पर हरीश रावत ने जताया गहरा शोक, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
दिल्ली के जनकपुरी में देर रात हुआ दर्दनाक हादसा पूरे देश को झकझोर देने वाला है। सड़क पर खोदे गए एक गहरे गड्ढे में गिरकर बाइक सवार युवक की मौत हो जाना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। मृतक की पहचान जनपद पौड़ी (उत्तराखंड) निवासी श्री कमल ध्यानी जी के रूप में हुई है, जो पालम में रह रहे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां दिल्ली जल बोर्ड का कार्य चल रहा था। सड़क पर गहरा गड्ढा खोदा गया था, लेकिन न तो उसे ढका गया, न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया और न ही बैरिकेडिंग की गई। रात के अंधेरे में युवक उस गड्ढे को देख नहीं पाया और सीधे उसमें जा गिरा। सवाल यह है कि आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?
इस घटना का एक और बेहद पीड़ादायक पहलू सामने आया—परिजन पूरी रात युवक की तलाश में दर्जनभर थानों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। सुबह करीब 7 बजे पुलिस का फोन आया और तब जाकर उन्हें युवक के शव मिलने की सूचना मिली। यह स्थिति प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाती है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की गंभीर चूक का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राजधानी जैसे महानगर में यदि सड़कों पर खुले गड्ढे मौत का कारण बन रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है। विकास कार्यों के नाम पर यदि आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है, तो यह स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, “दिल्ली में सड़क पर खुले गड्ढे में गिरकर जनपद पौड़ी के निवासी श्री कमल ध्यानी जी के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक है। यह मात्र दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की संवेदनहीनता का परिणाम प्रतीत होता है। मैं शोक-संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि विकास कार्यों के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। एक छोटी सी चूक किसी परिवार के जीवन में कभी न भरने वाला शून्य छोड़ सकती है। अब समय है कि जवाबदेही तय हो और ऐसी लापरवाहियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
