बसंत पंचमी पर जनकल्याण की वापसी: हरीश रावत ने शुरू की ‘इंदिरा अम्मा खिचड़ी
दून हॉस्पिटल में खिचड़ी वितरण, हरीश रावत ने कांग्रेस की जनकल्याणकारी योजना गिनाई
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर उस जनकल्याणकारी सोच की याद ताज़ा हुई, जिसकी बुनियाद अगस्त 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रखी थी। मौका था बसंत पंचमी का और स्थान था दून हॉस्पिटल परिसर, जहाँ इंदिरा गांधी जी के नाम पर इंदिरा अम्मा खिचड़ी वितरण का शुभारंभ किया गया।
हरीश रावत ने इस मौके पर साफ़ शब्दों में कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई इंदिरा अम्मा भोजनालय योजना केवल एक कैंटीन योजना नहीं थी, बल्कि यह गरीब, मजदूर, गिग वर्कर्स और निम्न मध्यम वर्ग के लिए सम्मान के साथ भोजन उपलब्ध कराने का एक सामाजिक संकल्प था। वर्ष 2015 में 14 भोजनालयों से शुरू हुई यह योजना आगे चलकर 45 से अधिक इंदिरा अम्मा कैंटीनों तक पहुँची, जहाँ मात्र 20 रुपये में गर्म, पौष्टिक और स्थानीय भोजन उपलब्ध कराया जाता था।
उन्होंने कहा कि इस योजना के चार स्पष्ट उद्देश्य थे—
शहरों, अर्धशहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले असंगठित मजदूरों को सस्ता और पौष्टिक भोजन देना;
मडुवा, झंगोरा, गहत, काले भट्ट जैसे उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को भोजन से जोड़कर पोषण और किसानों—दोनों को बढ़ावा देना;
देश के विशाल फूड मार्केट में उत्तराखंड के व्यंजनों को एक पहचान दिलाना;
और सबसे अहम, इन भोजनालयों का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला मंगल दलों को सौंपकर महिलाओं को रोज़गार और आत्मनिर्भरता देना।
हरीश रावत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि इन जनकल्याणकारी इंदिरा अम्मा कैंटीनों में से अधिकांश को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “इंदिरा गांधी जी का नाम सूर्य की तरह है, उसे कोई अंधकार ढक नहीं सकता, लेकिन उनके नाम पर शुरू हुई योजनाओं के उद्देश्य ज़िंदा रहना चाहिए।” इसी सोच के साथ दून हॉस्पिटल में आज इंदिरा अम्मा खिचड़ी बांटी गई और यह संकल्प लिया गया कि जहाँ-जहाँ इंदिरा अम्मा कैंटीनें थीं, वहाँ-वहाँ इस खिचड़ी का वितरण किया जाएगा।
बसंत पंचमी और माघ माह के पावन अवसर पर पीली खिचड़ी के साथ बसंतोत्सव भी मनाया गया। माहौल “इंदिरा जी ज़िंदाबाद” के नारों से गूंज उठा। हरीश रावत ने भावुक अंदाज़ में कहा कि बड़े नाम के साथ बड़ा काम अपने-आप हो जाता है—आज बारिश भी हुई और पहाड़ों में बर्फ़बारी भी शुरू हो गई, मानो इंदिरा जी के नाम का आशीर्वाद हो।
अंत में उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले वर्षों में माघ महीने में होने वाले खिचड़ी वितरण को औपचारिक रूप से “इंदिरा अम्मा खिचड़ी” नाम दिया जाएगा, ताकि जनकल्याण, स्थानीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण की यह परंपरा आगे बढ़ती रहे।
