मुस्लिम यूनिवर्सिटी का ताबीज पहन ले भाजपा — हरीश रावत का तीखा प्रहार, कानून व्यवस्था पर भी घेरा
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर “मुस्लिम यूनिवर्सिटी” का मुद्दा उछाला जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हल्द्वानी में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा को विकास नहीं, बल्कि “मुस्लिम यूनिवर्सिटी” याद आने लगती है।
हरीश रावत ने व्यंग्य करते हुए कहा— “भाजपा नेताओं को मुस्लिम यूनिवर्सिटी का ताबीज बनाकर अपने गले में डाल लेना चाहिए। 2022 में भी इसी ताबीज के सहारे सत्ता में आए और 2027 में भी शायद ‘तबीजाए नमोह’ के भरोसे चुनाव लड़ने की तैयारी है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस भूमि को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, वहां प्लॉट खरीदने वाले अधिकतर लोग हिंदू समुदाय से हैं। कुछ पूर्व सैनिक हैं, कुछ शिक्षक हैं, और कई ऐसे परिवार हैं जो वर्षों की बचत से देहरादून में अपना घर बसाने का सपना लेकर आए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी सरकार ने भूमि आवंटन किया है तो वह नियमों और नीति के तहत ही किया होगा।
हरीश रावत ने भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा— “यदि कांग्रेस ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय लिया हो, कोई बयान दिया हो, तो प्रमाण प्रस्तुत करें। प्रीतम सिंह जी की चुनौती स्वीकार करें। अगर प्रमाण मिल जाएं तो हम राजनीति से हटने को तैयार हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धौलास क्षेत्र के भूखंडों को लेकर जो अनापत्तियां (NOC) दी गईं, वे भाजपा शासनकाल में कई स्तरों पर स्वीकृत हुईं। ऐसे में आज वही लोग आरोप लगा रहे हैं, जिन्होंने स्वयं प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था।
हरीश रावत ने “डेमोग्राफिक चेंज” के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि लगभग 200 परिवारों में अधिकांश हिंदू हैं। उन्होंने कहा— “कर्म तुम्हारे, दोष हमारे सिर पर! यह कैसी राजनीति है?”
सिर्फ भूमि विवाद ही नहीं, हरीश रावत ने प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजधानी देहरादून में लगातार आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं। आए दिन हत्याएं हो रही हैं, महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं सामने आ रही हैं, और लोग भय के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त दिखाई देती है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
हरीश रावत ने कहा— “जब राजधानी सुरक्षित नहीं, तो प्रदेश का बाकी हिस्सा कैसे सुरक्षित माना जाए? सरकार को धर्म और भ्रम की राजनीति छोड़कर कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।”
हरीश रावत ने दोहराया कि उत्तराखंड को आज झूठ और भ्रम की राजनीति से मुक्ति दिलाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, भाजपा बार-बार धार्मिक ध्रुवीकरण के मुद्दों को हवा देकर जनता का ध्यान मूल समस्याओं से भटकाने का प्रयास करती है|उन्होंने कहा कि प्रदेश के सामने बेरोजगारी, महंगाई, सुरक्षा और विकास जैसे वास्तविक मुद्दे हैं। यदि किसी भूमि का दुरुपयोग हुआ है तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना प्रमाण पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना लोकतंत्र के लिए घातक है।
अंत में हरीश रावत ने जनता से अपील की कि वे अफवाहों और भावनात्मक मुद्दों से ऊपर उठकर पारदर्शिता, विकास और सामाजिक सौहार्द की राजनीति का समर्थन करें।
